अगर आप बांसुरी बजाते है तो बांसुरी का स्केल होगा :- A#
ऐसे क्यों कुछ तो लिखती हूं
सा–सा–ध–प–ध— ध–प–प–म–ग–ग-म—
लिख के मिटाती हूं मैं रात भर
ध–प–प–प-म–ग–ग-म–सा–ध़–ऩि(k)–ऩि(k)-सा—
ऐसे क्यों बातें खुद की ही
सा–सां–ध—नि(k)-ध— ध–प–प–म–ग–ग-म—
खुद से छुपाती हूं मैं आजकल
ध–प–नि(k)–ध–म–ग–ग-म–सा–ध़–ऩि(k)–ऩि(k)-सा—
पर ये सब सोचना
सा–ग–म–म—सा–ग–ग-म–
दिल को यूं खोलना
ग–म–ध–प–म–ग—म–ग–सा–
सब कुछ कहकर ही सबको बताना
सा–सा–रे–सा–ध़–रे–सा–ध़–रे–सा–
ज़रूरी है क्या आ आ आ आ आ आ
सा-ग-म-नि(k)-ध-म-ग-सा-ऩि(k)-सा-रे—म–ग–प–म–ग–रे–
ऐसे क्यों
सा–ग–ग-म–ग–म—
ऐसे क्यों उसके होठों पे
सा–सा–ध–प–ध— ध–प–प–म–ग–ग-म—
अच्छा लगता है मेरा नाम
ध–प–प–म–ग–ग-म–सा–ध़–ऩि(k)–ऩि(k)-सा—
ऐसे क्यों कुछ भी बोले वो
सा–सां–ध—नि(k)-ध— ध–प–प–म–ग–ग-म—
मन में घुलता है ज़ाफ़रान
ध–प–नि(k)–ध–म–ग–ग-म–सा–ध़–ऩि(k)–ऩि(k)-सा—
गिरता है गुलमोहर
सा–ग–म—सा–ग–ग-म–
ख्वाबों में रात भर
ग–म–ध–प–म–ग—म–ग–सा–
ऐसे ख्वाबों से बाहर निकलना
सा–सा–रे–सा–ध़–रे–सा–ध़–रे–सा–
ज़रूरी है क्या आ आ आ आ आ आ
सा-ग-म-नि(k)-ध-म-ग-सा-ऩि(k)-सा-रे—म–ग–प–म–ग–रे–
ऐसे क्यों
सा–ग–ग-म–