अगर आप बांसुरी बजाते है तो बांसुरी का स्केल होगा :- A
ज़माने की तरह
ध़–ग–रे–ग–म–ग—
हम भी तोड़े हैं गए
सा–सा–ग–रे–ग–म–ग–
ऐसे तन्हा तो न थे
ध़–ध़–ग-ग-रे–ग–म–ग—
तन्हा छोड़े हैं गए
ध-ध-ध–ध–प–ग–म–ग–
ना दिल से वो यादें जाएँ
ग–रे–सा–ध़–ध़–ग–ग–ग–
ना रातों को नींदें आएँ
ग–रे–सा–ध़–ध़–ग–ग–ग–
आते हैं फिर ख्वाब क्यों
ग–रे–सा–ऩि–सा—ऩि-ध़–
आते हैं फिर ख्वाब
ग–रे–सा–ऩि–सा—
जो थी तेरे इश्क में डूबी
ग–रे–सा–ध़–ध़–ध़-ग-ग–ग–
उन आँखों में तुम ले आए
ग–रे–सा–ध़–ध़–ध़-ग-ग–ग–
आँसू बेहिसाब क्यों
ग–रे–सा–ऩि–सा—ऩि-ध़–
आँसू बेहिसाब
ग–रे–सा–ऩि–सा—
खैर है यारों कम से कम
ध़–ऩि-सा–ध़–सा–ध़–सा–ध़–
जान से जा न पाए हम
ध़–ऩि-सा–ध़–सा–ध़–सा–ध़–
खैर है यारों कम से कम
ध़–ऩि-सा–ध़–सा–ग–सा–रे–
जान से जा न पाए हम
ध़–ऩि-सा–ध़–सा–ग–सा–रे–
इनकार के बहाने कई बार
ग-म-ध–ध-प–प-म–म-ग–ग-रे–रे-सा–
करते करते
रे–ग–रे–ग– रे–ग–रे–ग–
हमने वहीं लगाया दिल
ध़–ग–रे–ग–प-म–म-ग–
जहाँ दिल लगाना मना था
ग-रे–रे–ग–रे–रे–सा–ऩि–सा–
आखिर वहीं किए सजदे
ध़–ग–रे–ग–प-म–म-ग-ग–
जहाँ सर झुकाना मना था
ग-रे-रे–ग–रे–रे–सा–ऩि–सा–
क्यों ज़िन्दगी बिता दी जहाँ पे इक
ग-म-ध–ध-प–प-म–म-ग–ग-रे–रे-सा–
पल बिताना मना था
म–म–ग–ग–रे–रे–ग–
क्यों उस गली में रहते थे हम
ध़–ग–रे–ग–प-म-म–ग-ग–
जहाँ रोज़ जाना मना था
ग-रे-रे–ग–रे–रे–सा–ऩि–सा–