अगर आप बांसुरी बजाते है तो बांसुरी का स्केल होगा :- D#
ओ देश मेरे
प–प-ध-ध-सां-सां—
तेरी शान पे सदके
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
कोई धन है क्या
प-प-प-ध-ध-सां-सां—
तेरी धूल से बढ़के
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
तेरी धूप से रोशन
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
तेरी हवा पे ज़िंदा
सां-नि-ध-ध–प-प–प—
तू बाग़ है मेरा
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
मैं तेरा परिंदा
सां-नि-ध–ध–प-प–प—
है अर्ज़ी दीवाने की
गं-रें-सां–सां–सां–सां-नि–ध–सां–
जहाँ भोर सुहानी देखी
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि-ध–ध-प-म–
एक रोज़ वहीं मेरी शाम हो
म–म–म-ध-ध– ध–नि—ध–प–प–
कभी याद करे जो ज़माना
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि–ध–सां–
माटी पे मर मिट जाना
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि-ध–ध-प-म–
ज़िक्र में शामिल मेरा नाम हो
म-म-म-ध-ध–ध– ध–नि—ध–प–प—
ओ देश मेरे
प–प-ध-ध-सां-सां—
तेरी शान पे सदके
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
कोई धन है क्या
प-प-प-ध-ध-सां-सां—
तेरी धूल से बढ़के
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
तेरी धूप से रोशन
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
तेरी हवा पे ज़िंदा
सां-नि-ध-ध–प-प–प—
तू बाग़ है मेरा
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
मैं तेरा परिंदा
सां-नि-ध–ध–प-प–प—
आँचल तेरा रहे माँ
रे–नि— नि–ध–नि-नि–रें-सां—
रंग बिरंगा ओहो हो
सां-गं-गं-रें-रें–रें—नि-ध—ध-प–
ऊँचा आसमान से
रे–नि-ध–नि— नि–ध–नि–रें-सां—
हो तेरा तिरंगा
सां-सां-गं-गं-रें-रें–रें—
जीने की इज़ाज़त देदे
गं-रें-सां–सां–सां–सां-नि–ध–सां–
या हुकुम शहादत देदे
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि-ध–ध-प-म–
मंजूर हमें जो भी तू चुने
म–म–म-ध-ध– ध–नि—ध–प–प–
रेशम का हो मधुशाला
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि–ध–सां–
या कफ़न सिपाही वाला
गं-रें-सां–सां-सां-सां–सां-नि-ध–ध-प-म–
ओढ़ेंगे हम जो भी तू बूने
म–म–ध–ध–ध–नि—ध–प–प—
ओ देश मेरे
प–प-ध-ध-सां-सां—
तेरी शान पे सदके
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
कोई धन है क्या
प-प-प-ध-ध-सां-सां—
तेरी धूल से बढ़के
सां-सां-सां–रें-सां-नि-ध-नि—ध-प-
तेरी धूप से रोशन
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
तेरी हवा पे ज़िंदा
सां-नि-ध-ध–प-प–प—
तू बाग़ है मेरा
प-म-म–म-ध–ध-प-ध—
मैं तेरा परिंदा
सां-नि-ध–ध–प-प–प—