अगर आप बांसुरी बजाते है तो बांसुरी का स्केल होगा :- C#
कि जब मैं हद से आगे बढ़ गया था आशिक़ी में
ग-ग-म-म-प-प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
यानी ज़िन्दगी को ले रहा मज़ाक ही में
ग-म-म-प-प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
फिर मज़ाक ही में मिल गया सब ख़ाक ही में
रे-सा-रे-रे-ग-रे-रे-रे-रे-सा-रे-रे-ग-रे-
छू कर आया मंज़िलें तो तन्हा था मैं वापसी में
रे-ग-म-म-म-म-म-म-म-म-म-ग-ग-रे-म-ग-
जैसे फूल तोड़े होंगे तुमने झोली भर के
ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
मैं वो फूल जो के रह गया था शाख़ ही में
ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
जैसे ख़्वाब ही में ख़्वाबगाह आँख ही में
रे-सा-रे-रे-ग-रे-रे-रे-रे-सा-रे-रे-ग-रे-
पल से पल में क्या हुआ तुम रह गए बस याद ही में
रे-ग-म-म-म-म-म-म-म-म-म-ग-ग-रे-म-ग-
एक सवाल मचलता है मेरे दिल में कभी
ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
तुझे मैं भूल जाऊं या तुझे मैं याद करूँ
ग-ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
तुझी को सोच के लिखता हूँ जो भी लिखता हूँ
रे-सा-रे-रे-ग-रे-रे-रे-रे-सा-रे-रे-ग-रे-
अब लिख रहा हूँ तो फिर क्यों ना एक सवाल करूँ
रे-ग-म-म-म-म-म-म-म-म-म-ग-ग-रे-म-ग-
मैं इस सवाल से ग़म को बदल दूँ खुशियों में
ग-ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
पर इन बेजान सी खुशियों से क्या कमाल करूँ
ग-ग-म-प–प-प-प-प-प-प-प-म-म-ग-
पर अब सवाल भी कमाल तू संभाल ले फ़िलहाल
रे-रे-सा-रे–ग-रे-रे–रे-सा-रे–ग-रे-रे-
यह सवाल बिछा जाल क्या मैं चाल चलूँ
रे-ग-म–म-म-म–म-ग-ग-रे-म-ग-
चाल चल तू अपनी मैं तुझे पहचान लूँगा
ग-म-प-ग-ग-म-प-ग-ग-ग-ग-रे-रे-सा-
मैं अपनी महफिलों में सिर्फ़ तेरा ही नाम लूँगा
ग-ग-म-प-ग-ग-म-प-ग-ग-ग-ग-रे-रे-सा-
तुझे पसंद है धीमा लहजा और बस खामोशियाँ
रे-ग-म-म-म-म-म-म-म-म-म-म–म–म-म-म-
मैं तेरे ख़ातिर अपनी ख़ुद की सांसें थाम लूँगा
म-म-म-म-म-म-म-म-म-ग-ग-रे-म-ग-