अगर आप बांसुरी बजाते है तो बांसुरी का स्केल होगा :- G#
जब ज़िद पे आ गई पार्वती
ध–ध-ध-ध–प–म(t)–प–प-प-प–
पार्वती पार्वती
म(t)–रे–रे–म(t)—प–प-प-प–
समझाने पहुँचे सप्तऋषि
ध–ध–ध–प–म(t)–प–प-प-प–
सप्तऋषि सप्तऋषि
म(t)–रे–रे–म(t)—प–प-प-प–
काय ज़िद कर रही
सां–ध–ध–सां–सां–सां—
काय को मर रही
सां–ध–सां-सां–सां—
काय ज़िद कर रही
सां–ध–ध–सां–सां–सां—
काय को मर रही
सां–ध–सां-सां–सां—
ऐसे वर के लाने
नि–नि–ध–ध–नि–प–
काय ज़िद कर रही
सां–ध–ध–सां–सां–सां—
काय को मर रही
सां–ध–सां-सां–सां—
ऐसे वर के लाने
नि–नि–ध–ध–नि–प–
जाके शीश पे गंगा
प–प–ध–ध-ध-सां–सां–
और गले में
रें–रें-रें-रें–मं–
डारे फिर रहे साँप
पं–मं–गं–गं–रें—
जाके शीश पे गंगा
प-प-ध–ध-ध-सां–सां–
और गले में
रें–रें-रें-रें–मं–
डारे फिर रहे साँप
पं–मं–गं–गं–रें—
इतने सीधे साधे हैं
रें-रें-पं–पं–मं–मं–गं–रें–
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ
ध-सां–सां-नि(k)-नि(k)–ध–ध–प—ध–म(t)–म(t)–प—
जाके शीश पे गंगा
प-प-ध–ध-ध-सां–सां–
और गले में
रें–रें-रें-रें–मं–
डारे फिर रहे साँप
पं–मं–गं–गं–रें—
इतने सीधे साधे हैं
रें-रें-पं–पं–मं–मं–गं–रें–
सब कहते भोलेनाथ भोलेनाथ
ध-सां–सां-नि(k)-नि(k)–ध–ध–प—ध–म(t)–म(t)–प—